Indiaमें ऐसे असंख्य ऐतिहासिक स्थल हैं जो अपनी सभ्यता संस्कृति and Culture और सौंदर्य के लिए पुरे दुनिया में जाने जाते हैं ऐसा हीं एक ऐतिहासिक स्थल है , फतेहपुर  सीकरी ( Fatehpur Sikri In Uttar Pradesh)

Fatehpur Sikri In Uttar Pradesh

Fatehpur Sikri में Uttar Pradesh आगरा से लगभग 35 km दूर पश्चिम में स्थित लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ एक पहाड़ी पर स्थित है ऐसा माना जाता है कि फतेहपुर सिकरी को तीसरे मुग़ल बादशाह अकबर द्वारा बसाया गया और बाद में इसे राजधानी के रूप में इसे स्थापित किया फतेहपुर सीकरी अकबर की महत्वाकांक्षी वास्तुकलात्मक परियोजनाओं का प्रतिबिम्ब है।

यहाँ दो श्रेणियों के भवन हैं :-

पहला धार्मिक श्रेणी :- जमा मस्जिद में और बुलंद दरवाज़ा में इस्लामिक प्रभाव ज्यादा दिखाई देते हैं

दूसरी लौकिक श्रेणी :-इसमें प्रशासनिक भवन ,महल या mix  type की अधिकता हैं।  जोधाबाई के महल में हिन्दू और जैन मंदिरों की विशेषता देखने को मिलती है

इंडो -इस्लामिक वास्तुकला का एक मुख्य आकर्षण अकबर द्वारा फतेहपुर सीकरी में एक नई राजधानी का निर्माण था। यहाँ पर बने भवन हिन्दू और फ़ारसी शैलियों के अनूठे मिश्रण का प्रतिनिधित्व करते हैं।  नगर के अंदर स्थित कुछ महत्वपूर्ण भवन इस प्रकार हैं :-

Fatehpur Sikri In Uttar Pradesh

बुलंद दरवाज़ा :- मुग़ल काल के दौरान बनी भव्य संरचनाओं में से एक है । इसे मुग़ल बादशाह अकबर ने गुजरात विजयी होने के उपलक्ष में हीं बुलंद दरवाज़ा बनवाया था। यह 176 फुट ऊँचा दरवाज़ा है और ये एशिया का सबसे ऊँचा दरवाज़ा है। गुजरात से जितने के बाद अकबर ने  सीकरी का नाम ‘फतहपुर’ यानी विजय नगरी रख दिय। अब हम इसे फतेहपुर सीकरी के नाम से हीं जानते हैं । गुजरात विजय के दौरान  हीं अकबर पुर्तगालियों से मिले  और यहीं पर उन्होंने  पहली बार समुद्र देखा था। उन्होंने  हिन्दू-मुस्लिम संप्रदायों के बीच की दूरियां कम करने के लिए दीन-ए-इलाही नामक धर्म की स्थापना की।

Fatehpur Sikri In Uttar Pradesh

पंचमहल  :- पंचमहल की सपाट छत को सहारा देने के लिए विभिन्न स्तम्भों का इस्तेमाल किया गया है जो मंदिरों और विहारों की शैली को दर्शाता है।पांच मंजिला पंचमहल या हवामहल मरियम – उज -जमानी के सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बनवाया गया था। यहीं से अकबर की मुसलमान बेगमें  ईद का चांद देखा करती थी।  जोधाबाई का महल प्राचीन घरों के ढंग का बनाया गया था। इसके बनाने और सजाने में अकबर ने अपनी हिन्दू रानी के भावनाओं का विशेष ख्याल रखा था। भवन के अंदर आँगन में तुलसी का चौरा है और सामने दालान में एक मंदिर के चिन्ह हैं। दीवारों में मूर्तियों के लिए आले बने हुए हैं। कहीं – कहीं दीवारों पर कृष्णलीला के चित्र हैं ,जो बहुत धुंधले से पड़ गए हैं।

जोधाबाई का महल :-विशाल दिखने वाले इस महल में बहार दो बालकनियां हैं और अंदर से ऐसा लगता है और सारी चीज़े छुपा कर रखा गया है। ऊँचे कलात्मक दरवाज़े से निकलकर आदर आने पर हम एक बड़े हॉल से गुज़रते हैं जहाँ से अंदर की तरफ का रास्ता साफ़ दिखाई पड़ता है सीधा रास्ता हमे मुख्य आँगन की तरफ को ले जाता है जिसके चारो तरफ रिहाइशी कमरों को बनवाया गया था। एक तरह से दिखने वाली छज्जों से सजाई गयी इस दो मंज़िला इस इमारत को बलुआ और लाल पत्थरों से मिल कर बनाया गया था इस इमारत की विशेषता ये थी कि इसे कोष्टको की सहायता से सजाया गया था। जिसमे भवन के चारों तरफ लटकदार छज्जे बनाये गए थे।

Fatehpur Sikri In Uttar Pradesh

सलीम चिस्ती का मक़बरा  :- ये दरगाह सफ़ेद संगमरमर से बनी है। इसका निर्माणकार्य 1581 में पूरा हुआ था यहाँ पूरे देश के लोग मज़ार का दर्शन करते हैं और यहाँ की खूबसूरत नक्कासीदार खिड़कियों में लोग धागा बांधकर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगते हैं। सलीम चिश्ती के मक़बरे में कुछ सबसे best जाली का प्रयोग किया गया है। कहा जाता है कि अकबर की कोई संतान नहीं थी इसलिए अकबर अपनी बेग़म जोधा बाई के साथ संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर अजमेर में स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की ईदरगाह गए । अकबर की मुलाकात सूफ़ी सन्त शेख सलीम चिश्ती से हुई और  अकबर की मनोकामना पूरी होने की दुआ की। जब रानी गर्भवतीं हुईं तो अकबर ने उन्हें फतेहपुर सीकरी के शेख़ सलीम चिश्ती के दरबार में रहने के लिए व्यवस्था कर दी। अकबर की ख्वाहिश थी कि तैमूर का वंशज चिश्ती के साए में ही दुनिया में आये । जहांगीर के शुरुआती नाम ‘शेखू’ और ‘सलीम’ के चिश्ती के ही ने हीं नाम दिया।

इबादतखाना :- यहाँ पर अकबर विभिन्न धर्मों के नेताओं से मुलाकात किया करता था

दीवान-ए-खास :- यह महल अकबर का शाही कक्ष था। यहाँ पर अक्सर बादशाह अकबर , नवरत्नों से मंत्रणा (एक क्रिया है, जिसमें दो या दो से अधिक लोग आपस में किसी विषय पर विचार विमर्श करते है और किसी निष्कर्श पर पहुंचने की कोशिश करते हैं।) इसका निर्माण फ़ारसी वास्तु कला के अनुसार बहुत ही बड़े-बड़े और उस पर बेहद खूबसूरत नक्कासी किये हुए पत्थरों से किया गया है। इस इमारत को इस तरह से बनाया गया है कि बाहर से देखने पर यह केवल एक मंज़िला इमारत लगता है परन्तु वास्तव में अंदर से यह दो मंज़िला इमारत है।

dewan e khas

दीवान-ए-आम :- यह एक ऐसी इमारत थी जहाँ बादशाह अपनी प्रजा से मिलते थे , जनता दरबार लगता था और उनकी फरियादें सुनी जाती थी। इस इमारत का निर्माण पहले लकड़ी से किया गया था लेकिन बाद में कहा जाता है कि शाहजहाँ ने इसका निर्माण संगमरमर के पत्थरों से कराया। इन पत्थरों पर फूलों की बहुत ही खूबसूरत नक्कासी की गई है।

Fatehpur Sikri In Uttar Pradesh

राज महल :-इस महल की दीवारों पर पशु पक्षियों की बहुत ही सुंदर तथा कलात्मक चित्रो को उकेरा गया है। ये महल ऐसा माना जाता है कि बादशाह अकबर का ये शयन कक्ष था यहाँ पर वे आराम किया करते थे।

Fatehpur Sikri In Uttar Pradesh

इसी प्रकार टोडरमल के महल या तनसिंह के महल भी यहाँ उपस्थित है जहाँ हिन्दू प्रभाव बखूबी दिखते हैं।

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