एक शहर को जीवंत और समकालीन होना चाहिए, ऐसा जहाँ इतिहास के साथ ऊर्जा और ज़िंदादिली का मेल होता हो , अगर कोई हमारी पसंदीदा जगह के बारे में पूछे, तो हम अक्सर ऐसी जगहों का ही नाम लेते हैं जिनका एक इतिहास रहा है. और Delhi ऐसी ही शहरों में से एक है । दिल्ली कई साम्राज्यों की राजधानी रही और अगर आप इतिहास प्रेमी है, तो इसके इस वस्तृत इतिहास को देखने कम से कम एक बार Delhi जरुर आना होगा। यहाँ क़ुतुब मीनार से लेकर लाल किले तक कई ऐसी ऐतिहासिक स्मारकें, मस्जिदें, समाधियाँ और अन्य कई धरोहरें मौजूद है, जो अपने काल का सबूत देती है। पहले दिल्ली इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था ,इसका  इतिहास महाभारत के जितना ही पुराना है । इस शहर में हर मोड़ पर नयी दुनिया बसती है जहां लोगों के हौसलों को उड़ान मिलता है । मैं आपको ऐसी ही  Historical place से शुरुआत करना चाहूंगी,और अपना खूबसूरत अनुभव को  shareकरुँगी , सबसे पहले मैं  History और Architecture के बारे में कुछ  information देना चाहूंगी, जो किसी भी place पर घूमने से पहले हमें पता होनी चाहिए । सबसे पहले मैं आप को अपने साथ हुमायूँ का मकबरा (Humayun’s Tomb ) लेकर जाना चाहती हूँ।

humayun's tomb in delhi
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Humayun’s Tomb in delhi-

मेट्रो से हुमायूँ के मकबरे तक कैसे पहुंचे – Humayun Tomb in Delhi nearest metro / location

  • Humayun’s Tomb  के सबसे नज़दीकी मेट्रो स्टेशन: स्मारक के लिए सबसे नज़दीकी मेट्रो स्टेशन  yellow line पर जोर बाग मेट्रो स्टेशन (Jor Bagh metro ) है। यहां से आप टैक्सी या ऑटो ले सकते हैं।
  • violet line पर JLN स्टेडियम भी हुमायूँ के मकबरे के सबसे नज़दीकी मेट्रो स्टेशन में से एक है।
Humayun tomb in Delhi nearest metro- Jor Bagh metro
humayun tomb nearest metro / location

आपको कब आना चाहिए -Best Time To Visit Humayun’s Tomb In Hindi

Humayun’s Tomb in Delhi स्थित एक  Famous  Historical place और tourist place है। दिल्ली जाने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा है। दिल्ली में गर्मी बहुत ज्यादा पड़ती है, Temperature 52 डिग्री तक चला जाता है, इसलिए इस समय यहां आना सही नहीं होता। rainy season के दौरान Temperature में थोड़ी गिरावट आती है, लेकिन बारिश से आपके दर्शनीय स्थलों की planning में बाधा आ सकती है। इसलिए सर्दी / वसंत का मौसम दिल्ली जाने के लिए सबसे अच्छा महीना होता है।
हुमायूँ  tomb का opening time 6am से  6pm तक है  और  week में सभी दिन  खुले रहते है

Humayun’s Tomb Ticket Price In Hindi

हुमायूँ के मकबरे के लिए entry ticket 40 रूपये है , 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कोई entry ticket नहीं है।  

हुमायूँ के मकबरे का इतिहास -Humayun Tomb history in Hindi

यह मकबरा ऐसा पहला स्मारक है, जो love  और desire की story को दर्शाता है। यह मकबरा हुमायूँ की विधवा बेगम हमीदा बानो बेगम ने  अपने husband हुमायूँ की याद में बनवाया था। इस मकबरे में सम्राट और उनकी बेगम दोनों की कब्रें मौजूद हैं। यह Tomb आज भी उनके शाश्वत प्रेम के वसीयत  के रूप में खड़ा है। इस Campus में Main building मुगल सम्राट हुमायूँ का मकबरा है। Humayun’s Tomb के अलावा उसकी बेगम हमीदा बानो तथा बाद के सम्राट शाहजहां के ज्येष्ठ पुत्र दारा शिकोह और कई उत्तराधिकारी मुगल सम्राट जहांदर शाह, फर्रुख्शियार, रफी उल-दर्जत, रफी उद-दौलत एवं आलमगीर द्वितीय आदि की Tomb स्थित हैं। इस इमारत में  Mughal architecture में एक बड़ा बदलाव दिखा, जिसका प्रमुख अंग चारबाग शैली के garden थे। ऐसे garden भारत में इससे पहले कभी नहीं दिखे थे और इसके बाद अनेक इमारतों का integral part बनते गये। ये मकबरा मुगलों द्वारा इससे पहले बनाए गए बाबर के काबुल स्थित tomb” बाग ए बाबर “ से एकदम अलग था। बाबर के साथ ही सम्राटों को बाग में बने मकबरों में दफ़्न करने की परंपरा शुरु हुई थी।अपने पूर्वज तैमूर लंग के समरकंद (उज़्बेकिस्तान) में बने मकबरे पर आधारित ये इमारत भारत में आगे आने वाली Mughal architecture  के मकबरों की प्रेरणा बना। ये architecture अपने चरम पर ताजमहल के साथ पहुंचा इस भवन के वास्तुकार सैयद मुबारक इब्न मिराक घियाथुद्दीन एवं उसके पिता मिराक घुइयाथुद्दीन थे जिन्हें अफगानिस्तान के हेरात शहर से विशेष रूप से बुलवाया गया था। मुख्य इमारत लगभग आठ वर्षों में बनकर तैयार हुई

Humayun's tomb front view
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आईये चलते हैं इस खूबसूरत स्मारक को देखने.. …यहाँ तक पहुँचने का सबसे अच्छा रास्ता है दिल्ली मेट्रो तो मैंने भी दिल्ली मेट्रो की वॉयलेट लाइन ले ली और जवाहरलाल-नेहरू-स्टेडियम से ऑटो लिया .. ऑटो से खूबसूरत दिल्ली के नज़ारे लेते हुए मै पहुँच गयी हुमायु मक़बरे के  entry gate तक मैं  entry लेने जा ही रही थी की मेरी नज़र कई खूबसूरत तस्वीर पर पड़ी जो हुमायूं मकबरे की थी मैंने  entry ticket ली ,जो 40rs    की थी हांलाकि दिन रविवार था पर मै सुबह गयी थी तो भीड़ भी ज्यादा नही थी ………

Humayun's tomb directions
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प्रवेश द्वार लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ  Main road है और सीधा हुमायूं के Main tomb  तक पहुँचता है। सबसे पहले इसके Right hand side को स्थित है नियाजी इसा खाँ का tomb यह दुमंजिली building है और ऊपर Dome भी है। यह पूरे हुमायूं के मकबरे परिसर का एक भाग है लेकिन अपने-आप में उससे अलग एक independent परिसर का  मालूम होता है । इसा खाँ का tomb चारों ओर से दीवारों से घिरा है। इन दीवारों में छोटी-छोटी कोठरियां भी बनी हुई हैं। दीवारों के ठीक  middle में है मकबरा-ए-इसा खाँ जिसमें छह कबें बनी हुई हैं। ये tombs नियाजी इसा खाँ और उसके relatives की हैं। इस मकबरे की West direction में एक मस्जिद भी है। यह area हुमायूं के मकबरे से बीस वर्ष पहले इसा खाँ के  life-period में ही बन गया था। इसा खाँ शेरशाह सूरी का एक दरबारी अमीर था।

इसके बाद  Main road के Left ओर आता है  ,बू-हलीमा का tomb यह एक female की समाधि है  जिसके बारे में ज्यादा Information available नहीं है। हालांकि माना जाता है कि वह हुमायूं के फारस में रहने के दौरान उसके साथ रही थी। इसके बाद Main मार्ग पर एक इमारतनुमा  gate आता है। इसे Bu-Halima Gate कहा जाता है। सफेद रंग के इस दरवाजे के उपरी भाग में लाल और नीले रंग की design strip लगी है। बू-हलीमा गेट से निकलते ही right side में अरब-सराय का दरवाजा है।

यह सराय मकबरे के मिस्त्री-कारीगरों के  रहने के लिये बनवाई गई थी। अरब-सराय का दरवाजा वाकई  Attractive है। लाल बलुआ पत्थरों से इसकी सजावट  खूबसूरत लगती है। लाल पत्थरों पर सफेद संगमरमर से कारीगरी करके चकरियां भी बनाई गई हैं। दरवाजे के उपरी हिस्से में बाहर को निकली हुऐ  दरवाजे के उपरी हिस्से में बाहर को निकली हुऐ दो झरोखे बने हैं। एक झरोखा ठीक बीच में भी है। इसकी भीतरी छत अब गिर गई है। इसके बाद just सामने है हुमायूं के मकबरे का दरवाजा। बू हलीमा गेट से हुमायूं के मकबरे की ओर जाते हुए एक खास जगह पर ऐसा नजर आता है जैसे मकबरे का गुंबद इस दरवाजे पर ही रखा हुआ हो। दूर से ही इसकी ऐश्वर्य नजर आने लगती है। एक आलीशान स्मारक का आलीशान entry gate , यह काफी बङा है जिसमें दोनों ओर  room बने हुये हैं। इन कक्षों में मुगलों की समृद्ध विरासत की झांकियां दिखाई गई हैं, खासतौर पर हुमायूं के मकबरे से संबंधित। इसा खाँ के मकबरे की खुदाई से मिले बहुत से अवशेष भी यहीं हैं। संपूर्ण संरक्षित क्षेत्र का एक मॉडल भी रखा हुआ है। हुमायूं के मकबरे की तरफ मैं जैसे जैसे आगे बढ़ती जा रही थी हरियाली भी उतनी ही बढ़ती जा रही थी मकबरे की तरफ जाने से पहले मैं इस खूबसूरत बाग की सैर पर गयी…जिसे चार बाग़ गार्डन भी कहते हैं 30 हेक्टेयर में फैले इस मकबरे में 13 हेक्टेयर क्षेत्र में बाग़ है मुख्य इमारत के निर्माण में आठ वर्ष लगे, किन्तु इसकी पूर्ण शोभा इसको घेरे हुए 30 एकड़ में फैले चारबाग शैली के मुगल उद्यानों से निखरती है। ये उद्यान भारत ही नहीं बल्कि South Asia में अपनी प्रकार के पहले  Examples थे। ये high quality की Geometry के उदाहरण हैं। जन्नत  रूपी उद्यान चार दीवारी के भीतर बना है। ये  Garden चार भागों में पैदल पथों (खियाबान) और दो Separators केन्द्रीय जल नालिकाओं द्वारा बंटा हुआ है। ये इस्लाम के जन्नत के बाग में बहने वाली चार नदियों के परिचायक हैं। इस प्रकार बने चार बागों को फिर से पत्थर के बने रास्तों द्वारा चार-चार छोटे भागों में विभाजित किया गया है। इस प्रकार कुल मिलाकर 32 भाग बनते हैं। केन्द्रीय जल नालिका मुख्य द्वार से मकबरे तक जाती हुई उसके नीचे जाती और दूसरी ओर से फिर निकलती हुई प्रतीत होती है, ठीक जैसा कुरआन की आयतों में ’जन्नत के बाग’ का वर्णन किया गया है। मकबरे को घेरे हुए चारबाग हैं, व उन्हें घेरे हुए तीन ओर ऊंची पत्थर की चहार दीवारी है व तीसरी ओर कभी निकट ही यमुना नदी बहा करती थी, जो समय के साथ परिसर से दूर चली गई है। लाल बलुआ पत्थर से बनी यह इमारत मुगल वास्तुकला की सबसे बड़ी मिसाल है ऐसिहासकारों का दावा है कि किसी मकबरे के चारों तरफ garden का प्रचलन इससे पहले कभी नहीं हुआ और इसके बाद ही सम्राटों कोबाग के बने मकबरे में दफन करने की परंपरा शुरूहुई और और इसी के साथ भारत में चार बाग शैली का उदय हुआ बेगा बेगम द्वारा चुने गये पर्शियन आर्किटेक्ट मिरक मिर्ज़ा घियास ने इसे डिजाईन किया था। भारतीय उपमहाद्वीप का यह पहला गार्डन-मकबरा है। अब बाग़ की सैर के बाद हम आपको हुमायूं के मकबरे के सैर पर ले चलते हैं । इतिहासकारों  के अनुसार यहाँ हुमायु के अलावा उनके परिजनों के करीब 150 कब्र मौजूद हैं । मकबरे के प्रवेश द्वार जाने के लिए सीढ़ियां चढ़नी होती है । प्रवेश के लिए 16 मीटर की दो ऊँचे दो मंजिले प्रवेश द्वार पश्चिम और दक्षिण दिशा में बने हैं मुख्य इमारत के ऊपर बने सितारे के सामान ही 6 किनारों वाला सितारा मुख्य प्रवेश द्वार की शोभा बढ़ाता है मकबरे का निर्माण मूल रूप से लाल बलुआ पत्थरों से बना है इसके फर्श ,झरोखों की जालियां ,दरवाजे की चौखट और छज्जों के लिए white Marble का प्रयोग किया गया है मकबरे का विशाल गुम्बद भी इसी  संमरमर का इस्तेमाल किया गया है मकबरा 9 मीटर ऊँचा मूल चबूतरे पर खड़ा है इस वर्गाकार चबूतरे  के कोने को छांटकर 8 कोण का आभास दिया गया है । मकबरे के निचले तल में 64 कमरे हैं चार ऊपर है सभी कमरों में किसी न किसी की कब्र है । building पर फारसी बल्बुअस गुम्बद बना है, जो सबसे पहलेसिकन्दर लोदी के tomb में देखा गया था।  गुम्बद के ऊपर 6 मीटर ऊंचा पीतल का किरीट कलश रखा है ,और उसके ऊपर चंद्रमा लगा हुआ है, जो तैमूर वंश के tombs में मिलता है। गुम्बद दोहरी पर्त में बना है, बाहरी पर्त के बाहर white Marble का  cover लगा है और अंदरूनी पर्त गुफा type बनी है। गुम्बद के शुद्ध और निर्मल श्वेत रूप से अलग शेष इमारत लाल बलुआ पत्थर की बनी है, जिसपर white और black संगमर्मर तथा yellow बलुआ पत्थर से Mosaic का काम किया गया है। ये रंगों का  combination इमारत को एक अलग रूप देता है। बाहर से  easy दिखने वाली इमारत की आंतरिक योजना कुछ  Complex है। इसमें मुख्य केन्द्रीय कक्ष सहित नौ  square shape कक्ष बने हैं। इनमें middle में बने मुख्य कक्ष को घेरे हुए शेष आठ दुमंजिले कक्ष  middle में खुलते हैं। main कक्ष गुम्बददार (हुज़रा) एवं Double height का एक-मंजिला है और इसमें गुम्बद के नीचे एकदम middle में आठ किनारे वाले एक जालीदार घेरे में Second मुगल सम्राट हुमायुं की कब्र बनी है। ये इमारत की main tomb  है। इसका entry southern ओर एक ईवान से होता है, तथा अन्य  directions के ईवानों में  white Marble की जाली लगी हैं। सम्राट की असली समाधि ठीक नीचे आंतरिक कक्ष में बनी है, जिसका रास्ता बाहर से जाता है। इसके ठीक ऊपर  artificial किन्तु सुन्दर नक़ल बनायी हुई है। नीचे तक आम पर्यटकों Tourists को पहुंच नहीं दी गई है। पूरी  building में Petra Dura नामक संगमर्मर की  Mosaic का प्रयोग है और इस प्रकार के कब्र के नियोजन भारतीय-इस्लामिक स्थापत्यकला का महत्त्वपूर्ण अंग हैं, जो मुगल साम्राज्य के बाद के मकबरों, जैसे ताजमहल आदि में खूब प्रयोग हुए हैं। main कक्ष में संगमर्मर की जालीदार घेरे के ठीक ऊपर मेहराब भी बना है, जो  west में मक्का की ओर बना है। इस प्रकार कब्र के बनने में भारतीय इस्लामिक स्थापत्य कला के साथ साथ धार्मिक आस्था को भी बखूबी से देखा जा सकता है

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