आज मैं आपको ले कर चलती हूँ पुराना किला में तो चलिए मेरे साथ..मैं पहुँच चुकी हूँ पुराना किला(old fort) के पार्किंग में , ये एक common पार्किंग है पुराना किला और zoo के लिए ।

पुराना किला के parking prices

कुछ दूरी पर  पुराना किला (old fort) के पीछे भैरों मंदिर के पास अपनी कार खड़ी करने के लिए  Minimum 100 रुपये का खर्च आएगा। two-wheelers के लिए पार्किंग शुल्क 40 रुपये है। लोगों को अपनी कार लाने से रोकने के लिए  ratesको high रखा गया है ।

nearest metro station for old fort

वैसे आसानी से हम मेट्रो से जा सकते हैं …प्रगति मैदान निकटतम स्टेशन है वैसे आपको बताना चाहूंगी प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन  हो चूका है  blue line metro जहाँ से आपको आसानी से बस या ऑटो से  पुराना किला तक मिल जाएगा।

प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन  हो चूका है

चलिए पुराना किला घूमते हैं ……… घूमने के लिए मुख्य जगहें इस प्रकार हैं :-

Image source :- Google ( inside map of old fort पुराना किला के अंदर के map )
  • शेर मंडल –यह red sandstone  से बना एक डबल मंजिला tower है। यह भी कहा जाता है कि मुगल बादशाह हुमायूं इसका इस्तेमाल library के रूप में करते थे। इसकी सीढ़ियों से गिरकर ही उनकी मौत हुई थी।
  • Museum :- पुराना किला परिसर के अंदर एक संग्रहालय भी है जो area में पाए जाने वाले विभिन्न उत्खनन को  preserve और display करता है। इसमें खुदाई में निकले अवशेषों को लोगों के देखने के लिए रखा गया है।
  • बोटिंग (Boating) :- यहाँ एक झील भी है  जहाँ लोग  Boating करने आया  करते हैं  , जब आप पुराना किला आएँ और मौसम सुहाना हो रहा हो तो Boating जरूर करना चाहिए । Entry fee – 100rs per person boating
Image source :- Google ( Boating in old fort )
  • किला-ए-कुहना मस्जिद :- किले में आज मौजूद इमारतों में  किला-ए-कुहना मस्जिद है। इसके आंगन में एक Pond भी था, जिसमें  fountain लगा था। यह एक  single गुंबददार मस्जिद है ।  इस मस्जिद को lodi style से  mughal style में परिवर्तन एक बेहतरीन Example के तौर पर देखा जाता है। जिसमें नुकीले मेहराब और पाँच दरवाजे हैं। लाल बलुआ पत्थर के साथ  White marble का मिश्रण  शानदार दिखता है।
  • कुन्ती देवी मंदिर :- पुराने किले में कुन्ती देवी मंदिर के पीछे छिपे इतिहास history के बारे में भी कुछ ज्यादा  information नहीं है | पर ऐसा माना जाता है।  कि यह  temple पांडवों की मां कुंती ने, भगवान शिव और दुर्गा, के लिए बनवाया था । इसलिए, यह शिव-दुर्गा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
Image source :- Google
  • पुराना किला के परिसर में अन्य संरचनाएँ :- कैरूल मंज़िल, stepped well  (बाओली)
Image source :- Google ( kerul manzil in old fort)
  • Light and Sound Show  या “ इश्क़ -ए-दिल्ली “ :- यह शाम को किले के अंदर आयोजित किया जाता है। यह दिल्ली और किले के History से जुड़ी कई  Stories  को खूबसूरती से present करता है और उन पर प्रकाश डालता है। show timings
  • Sept. to Oct. 7.00 – 8.00 PM (Hindi), 8.30 – 9.30 PM (English)
  • Nov. to Jan. 6.00 – 7.00 PM (Hindi), 7.30 – 8.30 PM  (English)
  • Feb. to April 7.00 – 8.00 PM (Hindi), 8.30 – 9.30 PM (English)
  • May to Aug. 7.30 – 8.30 PM (Hindi), 9.00 – 10.00 PM (English)
Image source :- Google ( “ इश्क़ -ए-दिल्ली “ in old fort )

“ इश्क़ -ए-दिल्ली “ Show tickets price

Adults : – Rs. 100
Kids (3-12 years)/Students/Senior Citizens(60 years and above) : – Rs. 50
आप tickets ,online या offline दोनों तरीके से ले सकते हैं

  • खूबसूरत  और शानदार तीन entry gates :-बड़ा दरवाज़ा  ( किले में  west की ओर बड़ा दरवाजा है, जो आज भी use में आ रहा है ), हुमायूँ दरवाज़ा ( South  entry gate को ‘हुमायूं gate ’ के नाम से जाना जाता है ) और तालाकी दरवाज़ा ( North दरवाज़े को आज कल तलाकी दरवाज़ा के नाम से जाना जाता है 

पुराना किला का real में नाम पांडव किला था पर अंग्रेजों ने इसका नाम बदलकर पुराना किला रख दिया ,पांडव किले का इतिहास बहुत पुराना है इस किले के इतिहास में जाने से पहले आइये इसके अभी के स्वरुप का अवलोकन के लें ..

..पांडवों की विशाल राजधानी का ह्रदय स्थल ये पांडव किला बहुत हीं बड़ा है इसके दिवार की कुल लम्बाई लगभग 2 .4  किलोमीटर है और दिवार की ऊंचाई 21 मीटर तक है जबकि इसकी मोटाई 4 मीटर की है पांडव किला या पुराना किला  East और West की ओर ज्यादा विस्तार लिए हुए फैला है किले की दीवारों के  North और west दिशा में  Safety  के point of view से खाई बनाई गयी थी जो आज भी मौजूद है यहाँ एक झील भी है  जहाँ लोग बोटिंग करने आया  करते हैं   किले के तीन  entry gate  हैं जिसमे main entry gate ,west की ओर है दो अन्य दरवाज़े  North और  South direction में है  North दरवाज़े को आज कल तलाकी दरवाज़ा के नाम से जाना जाता है । इस दरवाजे gate की दीवारों में तीर और बंदूकों के कुछ छेद hole हैं। जैसा की इसके नाम से ही झलकता है , यह Common  दरवाजा नहीं था | तालाकी दरवाजा यमुना नदी से  Connect हुआ था, शायद यह किसी Attack के  Situation में भागने के लिए बनाया गया था। किले में घुसते ही right side में  म्यूजियम है। इसमें खुदाई में निकले अवशेषों को लोगों के देखने के लिए रखा गया है। पुराने किले में कुछ  modern structure भी हैं। इनमें आजादी के बाद पाकिस्तान जाने वाले refugees को रखा गया था।किले में घुसते ही right side में  म्यूजियम है। इसमें खुदाई में निकले अवशेषों को लोगों के देखने के लिए रखा गया है। पुराने किले में कुछ  modern structure भी हैं। इनमें आजादी के बाद पाकिस्तान जाने वाले refugees को रखा गया था।

पुराना किला के इतिहास

कहा जाता है कि दिल्ली को सर्वप्रथम पांडवों ने अपनी राजधानी इन्द्रप्रस्थ के रूप में बसाया था वह भी ईसापूर्व से 1400 वर्ष पहले, पर इसका कोई पक्का proof नहीं हैं। पांडवों की capital का पता लगाने के लिए कई बार किले में खुदाई की गई।  1955 में पुराने किले के south east हिस्से में खुदाई की गई थी। इसमें picture वाले  brown color के बर्तनों के  pieces मिले थे। इसके बाद 1969 में दोबारा खुदाई शुरू की गई। यह 1973 तक चलती रही। हालांकि,  picture वाले बर्तनों के लोगों की बस्ती का पता नहीं चला। मौर्य काल से शुरुआत से मुगल काल तक के कुछ न कुछ अवशेष जरूर मिले। इसके बाद साल 2014 में फिर से उसी part के आसपास खुदाई Archaeological survey of India ने की। इसमें भी brown color के बर्तनों के कुछ pieces  मिले। कोई structure सामने नहीं आया। मगर, मौर्य, शुंग, कुषाण, गुप्त, राजपूत शासन और मुगल सल्तनत के अवशेष मिलते रहे। 2017-18 में भी पांडवों की  capital इंद्रप्रस्थ का पता लगाने की कोशिश हुई। महाभारत  time  इमारत होने की कोई निशानी नहीं मिली। शुंग और कुषाण काल की मूर्तियां और  coins भी मिले।इतिहासकारों का मानना है कि शेरशाह सूरी (1538-45) ने दीनपनाह नगर में तोड़फोड़ की, जिसे मुगल बादशाह हुमायूं ने बनवाया था। इसी जगह उन्होंने fort  built  किया ,जो  old fort के नाम से जाना जाता है।  ऐसा माना जाता है कि शेरशाह सूरी old fort बनाने का काम पूरा नहीं कर पाए थे और इसे हुमायूं ने ही   complete करवाया। यह  fort यमुना नदी के किनारे था।

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