Ranikhet, uttarakhand  के almora district में है।  Ranikhet समुद्र तल से 1824 m की  Height पर  एक छोटा लेकिन बेहद beautiful hill station है।  Ranikhet में  district की सबसे बड़ी Army camp स्थापित हैं, जहाँ सैनिकों को Trained किया जाता हैं।

Ranikhet,

कुमाऊं क्षेत्र में पड़ने वाले  Ranikhet, से लगभग 400 km  लंबी बर्फों से ढके पर्वत-श्रृंखला का ज़्यादातर भाग दिखता हैं। इन पर्वतों की चोटियां सुबह-दोपहर-शाम अलग-अलग रंग की मालूम पड़ती हैं। 

Ranikhet की सुंदरता को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। दूर-दूर तक फैली घाटियां, घने जंगलों में सरसराते चीड़ के पेड़ (Pine trees) यहां की सुंदरता को और बढ़ा देती है हैं। दुनिया भर से हर साल लाखों लोग यहां  मौज-मस्ती करने के लिए आते हैं।

Ranikhet

रानीखेत से 6 km की दूरी पर बहुत बड़ा  golf field   है। उसके पास ही कलिका में कालीदेवी का Famous temple भी है।  रानीखेत से 7 km दूरी पर है- कलिका मंदिर। यहां माँ काली की पूजा की जाती है। यहां पर  Plants की बहुत ही बढ़िया Nursery भी हैं। ऊपर में Golf Course है और उसके पीछे बर्फ से ढंका हुआ पहाड़  बहुत हीं  ज्यादा खूबसूरत  है। Ranikhet, में इसके अलावा और भी  प्यारी जगहें हैं । यहां का बालू बांध मछली पकड़ने के लिए Famous है। Ranikhet से थोड़ी-थोड़ी दूरी पर घूमने के लिए कई जगह हैं जैसे almora जहां  से हिमालय की पहाड़ियों को  देखने का सुंदर दृश्य मन को मोह लेता है। रानीखेत का Chaubatia Garden पर्यटकों की पहली पसंद है। इसके अलावा यहां का सरकारी उद्यान और फल अनुसंधान केंद्र भी देखे जा सकता है। इनके पास में ही एक Water fall  भी है। कम भीड़-भाड़ और शा  Peaceful atmosphere रानीखेत को और भी ख़ास बना देता है।

ranikhet golf course
ranikhet golf course

Nanda Devi Mela

Nanda Devi Mela
Nanda Devi Mela

Nanda Devi Mela रानीखेत का सबसे बड़ा धार्मिक Religious और Cultural मेला है। इसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। इसकी शुरुआत 16वीं शताब्दी में राजा कल्याण चंद ने की थी। September के समय लगने वाला यह मेला देवी नंदा और सुनंदा को समर्पित होता है। यह मेला कई जगह लगाया जाता हैं । जैसे अल्मोड़ा, नैनीताल, दांडीधारा और रानीखेत। इसमें सबसे ज्यादा Famous मेला अल्मोड़ा और रूपकुंड का होता हैं।

History Of Ranikhet

ranikhet

कहा जाता हैं कि, Ranikhet रानी पद्मिनी के नाम पर पड़ा है रानी पद्मिनी महाराजा सुखदेव की पत्नी थीं,जो वहां के राज्य पर शासन करते थे । पद्मिनी, कुमाऊं क्षेत्र की सुंदर रानी रानीखेत आयीं थीं और इस जगह की खूबसूरती को देखकर यहीं रहने का मन बना लिया । इसलिए, महाराजा सुखदेव ने इस जगह पर एक महल का निर्माण कराया और इसे ‘रानीखेत’ का नाम दिया। हालांकि इस महल के लिए कोई पुरातात्विक साक्ष्य नहीं है ।अंग्रेजों ने बाद में Ranikhet को छुट्टियों में मौज-मस्ती के लिए Hill station के रूप में विकसित किया और 1869 में यहां कई camp बनवाईं जो अब ‘Kumaon Regimental Center’ है।

कब जाएं Ranikhet

Ranikhet का हर मौसम घूमने का आनंद देता है।लेकिन सबसे अच्छा समय Marchसे June तक का होता है। अगर आप ठंड में जाना चाहें तो सितम्बर से नवंबर के बीच जाएं, जब वहां का मौसम सबसे सुहावना और शांत होता है।

How To Reach Ranikhet

Kathgodam Railway Station यहां से 85 km की दूरी पर हैं। रानीखेत delhi से 279 किलोमीटर की दूरी पर है। एक बार अल्मोड़ा पहुंच कर आपको रानीखेत के लिए सीधे bus service मिल जाएगी। रानीखेत जाने के लिए आपके पास बहुत से option हैं। जैसे Airways, railways या roadways से। अगर आप हवाई जहाज से जाना चाहते हैं, तो पंतनगर के हवाई हड्डे पर उतरना पड़ेगा, क्योंकि यहां का भी Nearest Airport वही हैं। वहां से रानीखेत की 119 किलोमीटर की दूरी taxi वगैरह से तय करनी पड़ेगी। अगर आप train से यात्रा करना चाहते हैं, तो Kathgodam Railway Station तक जा सकते हैं, क्योंकि रानीखेत का Nearest रेलवे स्टेशन वही हैं। वहां से रानीखेत की 84 किलोमीटर की दूरी परिवहन निगम की Bus या taxi से तय की जा सकती हैं।

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