Rishikesh yoga capital of the world

Rishikesh  जो गंगा नदी के किनारे  Uttarakhand State  में स्थित है। Rishikesh को yoga capital of the world के नाम से भी जाना जाता है । यहाँ बहुत सारे  yoga center हैं यहाँ के कुछ आश्रम में योग की विद्या मुफ्त में सिखाई जाती है । Rishikesh हिमालय का प्रवेशद्वार भी कहलाता है यहाँ पर गंगा पर्वतमालाओं को पीछे छोड़ समतल धरातल की ओर आगे बढ़ती है । Rishikesh अपने yoga center ,आश्रम और मंदिरों के लिए मशहूर है यहाँ आप Bungee jumping ,River-Rafting जैसे चीज़ों का मज़ा ले सकते हैं । Rishikesh हरिद्वार से 25 km उत्तर में तथा देहरादून से 43 km की दूरी पर है ।

Rishikesh yoga capital of the world
Yoga

Rishikesh में सबसे पहले मैं त्रिवेणी घाट पर गयी । कहा जाता है कि इस स्थान पर हिन्दू धर्म की तीन प्रमुख नदिया गंगा ,यमुना और सरस्वती का संगम होता है । यहाँ पर शिव पारवती की भी मूर्तियां हैंऔर भगवन शंकर की जटाओं से प्रकट होती गंगा नदी भी दिखाई देती है । ऐसी स्थान पर गंगा नदी दायी और मुड़ती है । पहाड़ों में से आने वाले गंगा नदी का नज़ारा बहुत हीं खूबसूरत होता है । हिमालय की पहरड़ियाँ और प्राकृतिक सौंदर्यता से हीं इस धार्मिक स्थान से बहती गंगा नदी Rishikesh को सबसे अलग बनातीं है । यहाँ स्नान करने का यह एक प्रमुख घाट है ,जहाँ प्रातः काल में अनेक श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगते है । यहाँ गंगा का पानी बहुत साफ है । घाट पर कुछ न कुछ धार्मिक कार्यक्रम चलते हीं रहते हैं ।

यहाँ शाम को होने वाले आरती का नज़ारा बेहद आकर्षक होता है । त्रिवेणी घाट के आस हीं भरत मंदिर में  भी आप घूम सकते हैं यह Rishikesh का सबसे प्राचीन मंदिर है जिसे 12 शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य जी ने बनाया था । त्रिवेणी घाट के सामने बहुत सारी पूजा सामग्री की दुकाने लगी होती है ।

Rishikesh yoga capital of the world
triveni ghat

थोड़ी देर तक बाजार में घूमे और कुछ खाया । यहाँ पर एक पुरानी  हवेली है। Rishikesh में विदेशी आपको बहुत संख्या में दिखाई देंगे 1960 में इंग्लैंड का प्रसिद्ध बैंड्स the Beatles यहाँ पर योग का अध्ययन करने आये थे । तभी से राजाजी नेशनल पार्क beatles के नाम पर आश्रम बनाया गया । अब मैं लक्ष्मण झूला देखने जा रही हूँ । गंगा नदी की एक किनारे से दूसरा किनारा जोड़ने वाला झूला यहाँ की अलग पहचान है । कहा जाता है कि लक्ष्मण झूला असल में एक पुल है । जिसे 1929 में बनवाया गया था। इस से पहले इसी स्थान पे एक और पुल था जो 1924 की बाढ़ में नष्ट हो गया था । ऐसा माना जाता है की जूट की बनी रसियों के पुल द्वारा लक्ष्मण ने यहाँ से गंगा को पार किया था । इसलिए उस पुल का नाम लक्ष्मण झूला पड़ गया। इस पुल से पहाड़ियों के बीच से आती हुई गंगा नदी का अति-मनोरम दृश्य देखने को मिलता है। राम झूला नामक एक अन्य पुल लक्ष्मण झूले से कुछ दूरी पे है।

Rishikesh yoga capital of the world
Laxman jhula

यह झूला शिवानंद और स्वर्ग आश्रम के बीच बना है । ऐसी लियए इसे शिवानंद झूला के नाम से भी जाना जाता है । झूले से एक बड़ी सी इमारत दिखती है वो कैलाश निकेतन मंदिर है । इसे 13 मंज़िला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है ।,झूले पर खड़े होकर आस पास के खूबसूरत नज़ारे का आनंद लिया जा सकता है । झूले के बीचो बीच पहुँचने पर आपको झूला हिलता हुआ सा लगेगा । 13 मंज़िला मंदिर में 13 मंज़िल पर जाने के लिए मंदिर के गोल गोल चक्कर लगते सभी देवताओं के दर्शन लेते हुए जाना होता है । यहाँ पहुँचने पर झूला और सूर्यास्त का बहुत हीं सुन्दर नज़ारा देखने को मिलता है । इस भक्ति भरे वातावरण को हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते आप रोज़ मर्रा कि चिंताओं को भूलकर एक अलग हीं आनंद कि दुनिया में खो जायेंगे ऐसी मंदिर के निचले हिस्से में गंगा जी कि आरती होती है ।

 Rishikesh

यहां से हम परमार्थ निकेतन के लिए चले जहां हमने परमार्थ निकेतन के सामने जीवन में पहली बार हर रोज़ की जाने वाली गंगा आरती में गयी । इससे पहले मैंने हरिद्वार की गंगा आरती  देखी है और ऋषिकेश के बारे मे सुनते थे कि वहां भी वैसी ही आरती होती है। शाम  5.15 का समय था। कार्यक्रम का शुभारम्भ हो चुका था। गंगा के किनारे  पर बने एक घाट पर लोहे का बना के एक बड़े यज्ञकुण्ड में हवन किया जा रहा था इसके आस पास यजमान बैठे थे। पास में हीं बड़ी संख्या में अनेक Foreignersजिसमें अधिकांश youngster थे, आरती व यज्ञ में उपस्थित थे। चारों ओर सैकड़ों की संख्या में अन्य भारतीय भी उपस्थित थे। सूर्यास्त का समय होने को था। यज्ञ के मन्त्रों की स्पष्ट ध्वनि सुनाई नहीं दे रही थी जिसमें किसी पौराणिक ग्रन्थ, हो सकता है कि किसी पुराण आदि का पाठ हो, संस्कृत में पाठ हो रहा था। यज्ञ की समाप्ति के बाद पौराणिक भजन हुए। एक पौराणिक भजन था ‘गोविन्द बोलो हरि गोपाल बोलो, राधा कृष्ण हरि गोविन्द बोलो’ इसके बाद ‘हनुमान चालिसा’ का Sound amplifier पर पाठ किया गया। सभी देशी व विदेशी भक्तगण आंखे बन्द कर धीरे धीरे हाथ से भजन के अनुरुप श्रद्धापूर्वक तालियां बजा रहे थे। इसके बाद ‘हरे रामा हरे कृष्णा, रामा रामा कृष्णा कृष्णा’ भजन व गीत भी प्रसारित हुआ । कुछ एक दो अन्य भजन भी हुए और उसके बाद गंगा की आरती हुई जिसमें अनेक दीप व ज्योतियां प्रज्जवलित हो रही थीं। गंगा आरती का कार्यक्रम लगभग 6.10 बजे सायं समाप्त हो गया ।

Rishikesh

हिमालय की निचली पहाड़ियों और प्राकृतिक सुंदरता से घिरे इस धार्मिक स्थान से बहती गंगा नदी इसे सबसे अलग बनातीं है।

ऋषिकेश को केदारनाथ ,बदरीनाथ गंगोत्री  और यमुनोत्री का प्रवेशद्वार भी कहते हैं। कहा जाता है की समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को  शिव जी ने इसी जगह पर पिया था ये भी कहा जाता है, कि ऋषि रैभ्य ने यहाँ ईश्वर के दर्शन के लिए कठोर तपस्या  कि थी । उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ऋषिकेश के रूप में प्रकट हुए तभी से इस स्थान को ऋषिकेश के नाम से जाना जाने लगा । कहा जाता है कि इस स्थान पारर ध्यान लगाने से मोक्ष कि प्राप्ति होती है ।

इसके सामने हीं राम झूला बना है लक्ष्मण झूले के तर्ज़ पर हीं ये झूला बना है । ये पूल गंगा नदी पार करने में उपयोग किया जाता है । विदेशी भी यहाँ आध्यात्मिक सुख कि चाहत में नियमित रूप से यहाँ आते हैं ,राम झूला पार करते हीं गीता भवन है । यहाँ रामायण और महाभारत के चित्रों से सजी दीवारे इस जगह को आकर्षित बनातीं है। तीर्थ यात्रियों के लिए यहाँ सैकड़ों कमरे हैं । जब भी आप ऋषिकेश आये तो 22 km दुरी पार 3000 साल पुरानी वसिष्ठ गुफा जो बद्रीनाथ और केदारनाथ के मार्ग पार स्थित है उसे भी आप देख सकते हैं ।

आप उसके बाद नीलकंठ मंदिर भी जा सकते हैं । नीलकंठ महादेव मंदिर लगभग 5500 फिट कि ऊंचाई पर स्वर्ग आश्रम पहाड़ी की  चोटी पर  नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है कहा जाता है कि भगवन शिव ने इस स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया था विषपान के बाद विष के प्रभाव उनका गाला नीला पड़ा था और उन्हें नीलकंठ के नाम से जाना गया ।

Rishikesh
Rishikesh

योग के साथ साथ ऋषिकेश अपने आयुर्वेदिक उपचार पद्धति के लिए भी जाना जाता है ।

River Rafting

मैंने River Rafting के लिए hotel के पास वाले एजेंसी से बात की और उन्होंने बोला कि  River Rafting के लिए 8 person की आवश्यकता है ,परन्तु हम तीन friends हीं थे तो बांकी के 5 का group हमे बाद में join करने वाला था । हम बांकियों के लिए शुरुआत में अपरिचित थे परन्तु  थोड़े time बाद हीं इतनी अच्छी तरह से हम सब घुल मिल गए कि ऐसा लगा हीं नहीं कि हम अनजान थे । ये tour एक बहुत हीं दिलचस्प और यादगार रही जिसे मैं कभी भी नहीं भूल सकती ।आप कितने Adventurers हैं, यह आपके River Rafting के Type से पता चल सकेगा। राफ्टिंग दो तरह से की जाती हैं ।

Rishikesh yoga capital of the world
Rishikesh 

White water rafting :- White water rafting में पानी की तेज लहरें जब चट्टानों या पत्थरों से टकराती हैं तो इससे उठने वाला उफान या लहर water को White बना देता है।
Black water rafting :- : कम उफान या लहर और जहां नदी की लहरें कम हों तो उसे Black water rafting का नाम दिया गया है।

आप Distance के अनुसार Rafting boat . book करवा सकते हैं, जैसे :- ब्रह्मपुरी से रामझूला तक 3 घंटे में 12 km के हिसाब से , शिवपुरी से रामझूला तक 4 घंटे में 18 किमी. Mary drive , से रामझूला तक 6 घंटे 27 km और कौडियाल से रामझूला तक पूरे दिन के लिए 36 km ।

मैंने  ब्रह्मपुरी से रामझूला तक 3 घंटे में 12 km की बहुत रोमांचक यात्रा की । सबसे पहले हमे सारी  guideline समझायी जाती है और फिर यात्रा शुरू होती है । River Rafting  में सबसे सुखद अनुभव तो पर्वतों के बीच से बहती तेज नदी के बीच एक छोटे से Raftt  से  हरे-भरे  पर्वतों और ऊँचे पहाड़ों  को देख कर होता है | ऐसे अनुभव को बयां नहीं किया जा सकता है केवल feel  किया जा सकता है जब बीच में नदी की लहर शांत रहती है तो कमांडो हमें पानी में उतरने की इज़ाज़त देता है वो सबसे प्यारी feelings थी । रामझूला से ठीक पहले Raft  को किनारे लगाया जाता है। यहां पर पहाड़ों से एक झरना गंगा नदी में आकर मिलता है, यहीं पर Bungee Jumping Point है।आप जब भी ऋषिकेश आएं तो  River Rafting miss ना करें । River Rafting का प्लान बना रहे हैं तो मार्च से जून तक का समय बेहतर है। ये महीने राफ्टिंग के लिए बेहतरीन होते हैं।

Rishikesh

आशा है कि आपको यह यात्रा अच्छी लगी होगी ।

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