दोस्तों आज हम आपको विश्व पर्वतीय नगर मनाली की Tourist Places यात्रा के बारे में बताएंगे

Tourist Places In Manali
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Manali दुनिया की सबसे बड़ी पर्वतमाला हिमालय की गोद में बसा एक बहुत हीं सूंदर और लोकप्रिय पर्वतीय स्थल है जो भारत के उत्तर दिशा में हिमाचल प्रदेश राज्य के कुल्लू  जिले में स्थित है।  ये हिल स्टेशन समुद्र तल से 6400 फुट की ऊंचाई पर स्थित है व्यास नदी के किनारे बसा यह खूबसूरत शहर अपनी हरी भरी घाटियों झरनो और ऊँचे ऊँचे बर्फ से ढंके पहाड़ों के लिए जाना जाता है यहाँ की शीतल और स्वच्छ जलवायु घने जंगल सर्दी के मौसम में बर्फ से घिरी घाटियां प्रकृति प्रेमियों को हर समय अपनी ओर आकर्षित करती है और ये एक ऐसा हिल स्टेशन है जहाँ सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं।

मनाली कुल्लू से 40 km ,चंडीगढ़ से 310 km , और दिल्ली से 550 km की दूरी पर है प्रसिद्ध पर्वतीय नगर होने के कारण अन्य शहरों से यहाँ पर पहुँचने के भरपूर साधन बहुत हीं आसानी से यहाँ पर मिल जाते हैं वैसे तो मनाली में सालभर टूरिस्ट आते रहते हैं फिर भी मनाली जाने का सबसे अच्छा समय गर्मियों में अप्रैल से जून महीने का है। गर्मियों में हज़ारों की संख्या में लोग मैदानी इलाके की गर्मियों से छुटकारा पाने के लिए यहाँ आते हैं। मनाली में जनवरी से मार्च के महीने में काफी बर्फ पड़ती है। जिन लोगों को बर्फीली जगहें पसंद हों वे इस समय में बर्फ का आनंद  ले सकते हैं।

मनाली जाने के लिए दिल्ली ,चंडीगढ़ और कुल्लू से नियमित रूप से बसें और टैक्सी चलती रहती हैं और यदि ट्रैन से जाना हो तो मनाली का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन चंडीगढ़ है। मनाली से 50km की दूरी पर भुंतर( Bhuntar ) Airport बना है ,देश के विभिन्न शहरों से भुंतर के लिए नियमित हवाई सेवा भी है।  मनाली में गर्मियों में बहुत भीड़ होती है इसलिए मनाली जाने से पहले पर्यटकों को होटल ऑनलाइन बुक कराकर जाना चाहिए।  जिनका आमतौर पर किराया 1000rs से ले कर 10000 rs तक का होता है।

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मनाली में खाने पीने के लिए बहुत सारे रेस्टोरेंट हैं जिनमे सभी तरह के व्यंजन मिल जाते हैं। मनाली में और उसके आस पास घूमने के कई प्रसिद्ध स्थान है

हिडिम्बा देवी मंदिर

hidimba devi temple
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इसमें से हिडिम्बा देवी मंदिर प्रमुख है। हिडिम्बा देवी मंदिर मालरोड से लगभग 2 km की दूरी पर है। पगोड़ा शैली में लकड़ी  से बने इस मंदिर की चार छतें हैं नीचे की तीन छत की लकड़ी के तख्तों से  बना हुआ है जबकि उपर की चौथी छत तांबे  और पीतल से बनी है। ये बहुत प्राचीन मंदिर है और मंदिर परिसर चारो तरफ से ऊँचे ऊँचे घने देवदार के पेड़ों से घिरा हुआ है। मंदिर तक का रास्ता खूबसूरत बगीचों से होता हुआ जाता है। मंदिर के गर्भ गृह में हिडिम्बा देवी की प्रतिमा विराजमान है जिसकी पूजा और दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ हमेशा रहती है। मंदिर परिसर के आस पास काफी अच्छा बाजार है। मंदिर के सामने हीं कार पार्किंग  की अच्छी सुविधा है

हिडिम्बा देवी मंदिर की कहानी

इस मंदिर का सम्बन्ध महाभारत के पांडवों से है ।  ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर को कुल्लू के राजा बहादुर सिंह ने 1553 में करवाया था। लकड़ी से बनी इस मंदिर की छत पर एक के ऊपर एक चार शिखर बने हुए हैं जो निर्माण कला का बहुत अद्भुद उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। मनाली शहर पुरे कुल्लू क्षेत्र के लोग इसे अपनी प्रमुख कुलदेवी मानते हैं। यहाँ की प्रमुख कुलदेवी को डूंगरी देवी कहते हैं ऐसी कारन हिडिम्बा देवी को डूंगरी माता कहकर भी पुकारा जाता है।

ऐसा प्रतीत होता है जैसे आकाश की ओर सर उठाये खड़ी देवदार  के वृक्ष हिडम्बा देवी की सुरक्षा में भीम द्वारा स्थापित किये गए प्रहरी हों भीतर एक पत्थर को काटकर मंदिर के गर्भ गृह का निर्माण किया  गया  है जो एक गुफा के तरह प्रतीत होता है।  इस गुफा के ऊपरी भाग में कुछ प्रतिमाएं अंकित की गयी हैं निचे के भाग में देवी हिडम्बा के चरण अंकित हैं। भक्तों के द्वारा इन्हीं चरणों का प्रयोग किया जाता है मंदिर के भीतर हर वस्तु लकड़ी से बनी हुई है इसकी दीवारें छत सभी लकड़ी से बनी है ओर इसपर काफी छोटी छोटी चित्रकारी की गयी है। लकड़ी से हीं  बनाये गए कई प्रकार के जानवरों के चेहरे भी मंदिर के भीतर प्रदर्शित किये गए हैं।

Manali
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हर वर्ष 14 मई को हिडम्बा देवी की जयंती मनाई जाती है। इस अवसर पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस पूजा को स्थानीय लोग घोर पूजा कहते हैं। इस पूजा में भाग लेने हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर में एकत्रित होते हैं और एक मेले का आयोजन भी ऐसी दिन किया जाता है। कुल्लू के विश्व प्रसिद्ध दशहरे में जब सभी देवताओं को पालकी में बिठाकर शोभा यात्रा निकली जाती है तो उसमे हिडम्बा देवी की पालकी सबसे आगे होती है इस बात से अस्पस्ट हो जाता है की यहाँ के लोगों के दिलों में देवी हिडम्बा के प्रति कितनी श्रद्धा है।

हिडम्बा देवी का वर्णन महाभारत ग्रन्थ में प्रमुख रूप से वर्णित है। पांडव जब वनवास के समय वन वन घूम रहे थे तो इस स्थान पर पहुंचकर उन्होंने विश्राम करने का निर्णय लिया भीम ने प्रहरी बनने का दायित्व लेकर सबको विश्राम करने को कहा कहते हैं इस स्थान के निकट हिन् हिडम्बा नाम का एक राक्षस और उसकी बहिन हिडिम्बी रहा करते थे दोनों बड़े हिन् बलवान थे पुरुषों की गंध पाकर दोनों समझ गए कि निकट हीं कहीं उनका शिकार है। जब वो दोनों छिपकर वहां गए तो देखा कि सभी गहरी निंद्रा में हैं केवल  एक पुरुष हीं जग रहा है।

ये देखकर हिडिम्बा ने अपनी बहिन हिडिम्बी से कहा कि वो उस पुरुष को अपने मोह जाल में फंसा ले तो वो अन्य पुरुषों को मारकर अपना भोजन बना सकते हैं। हिडिम्बी जब भीम के निकट पहुंची तो वो उसपर मोहित हो गयी और विवाह का प्रस्ताव रखा और यहाँ आने का पूरा प्रयोजन सच सच बता दिया वो तत्काल राक्षस रूप त्याग कर एक सूंदर स्त्री के रूप में भीम के सामने पकट हुई और उसने बताया कि किस प्रकार उसने और उसके भाई हिडिम्बा ने उनसबकू खा जाने की योजना बनायीं थी भीम ने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया और हिडिम्बा को युद्ध की चुनौती दी युद्ध का शोर सुनकर बांकी पांडव भी जग गए किन्तु किसी ने भी  युद्ध में हस्तक्षेप नहीं किया उन्हें भीम की शक्ति और युद्ध कौशल पर पूरा भरोसा था। भीम और हिडिम्बा के बीच घोर युद्ध हुआ किन्तु अंत में भीम ने हिडिम्बा का वध कर डाला। इसके उपरांत हिडिम्बी ने कुंती के पास जाकर भीम के प्रति अपने प्रेम और विवाह के प्रस्ताव की सारी बात कहीं। हिडिम्बी ने ये भी कहा कि अब वो इस निर्जन स्थान पर अकेली  किसके सहारे अपना जीवन व्यतीत करेगी। उसने विनम्र होकर कुंती से प्रार्थना  की कि वो भीम से कहे कि वो उससे विवाह कर ले।

कहते हैं कि फिर वो कुंती की आज्ञा पर भीम ने ये कहकर हिडिम्बी से विवाह किया कि पहली संतान के उत्पन्न होने उपरांत वो उसे छोड़कर चला जायेगा। हिडिम्बी ने भीम के इस बात को स्वीकार कर लिया। भीम एक वर्ष तक हिडिम्बी के साथ रहे और हिडिम्बी को पुत्र प्राप्ति के उपरांत हीं वो यहाँ से प्रस्थान कर गए।

भीम और हिडम्बी  के उस पुत्र का नाम घटोत्कच रखा गया। घटोत्कच ने महाभारत युद्ध में बड़ी हीं महत्वपूर्ण भूमिका निभायी पांडवों के ओर से युद्ध में भाग लेकर उसने वीरगति प्राप्त करने से पहले कौरवों को बहुत क्षति पहुंचायी। ऐसा मना जाता है कि भीम के चले जाने के उपरांत हिडम्बी ने जो राक्षस रूप त्याग कर चुकी थी और आध्यात्मिकता का मार्ग अपना लिया था।  मनाली में इसी स्थान पर वर्षों तप किया ऐसा भी मन जाता है  कि इसी स्थान पर उनका विवाह हुआ  था । हिडम्बा देवी की ये कथा केवल राक्षस वध और एक राक्षसनी के किसी पुरुष के प्रति प्रेम की कथा नहीं है बल्कि ये हमे बताती है कि मनुष्य  कि वास्तविक पहचान उसके कर्मो से हीं होती है। हिडिम्बा जबतक दैत्यों के कर्म करती रही तो उससे लोग भयभीत रहते थे ,और अगर वो जीवन भर उन्हीं कर्मो में लिप्त रहती तो संभवतः आज कहीं भी उसका कोई नाम न होता पूजा करना तो दूर कि बात उनका नाम भी लेना अशुभ माना  जाना था। ये  कर्म हीं है जो मनुष्य का वर्तमान हीं नहीं बल्कि भविष्य भी तय करते है। ये उत्तम कथा केवल एक कथा नहीं बल्कि सभी मनुष्यों के लिए शिक्षा और प्रेरणा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। 

हिडिम्बा मंदिर से कुछ कदम की दूरी पर घटोत्कक्ष मंदिर भी है मंदिर के पास हीं देवदार के पेड़ों से घिरी वन विहार है इसमें प्रवेश के लिए 5rs प्रति व्यक्ति के हिसाब से टिकट लेना होता है। मंदिर परिसर के बराबर में बच्चों के मनोरंजन के लिए एक अप्पू घर भी बना हुआ है।

Club house Manali

Club house Manali
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मनाली का सबसे मनोरंजन पर्यटक स्थल क्लब हाउस है। यह मनाली बस स्टैंड से लगभग  डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर मनाल्सु नदी के किनारे  स्थित है। क्लब हाउस में प्रवेश करने के लिए प्रति व्यक्ति 10rs  के हिसाब से टिकट लेना होता है। क्लब हाउस में रोमांचक गेम जैसे रस्सी पर लटककर नदी पर करना ,नहर में बोटिंग करना और बच्चो के मनोरंजन के लिए कई तरह के झूलों और खाने पीने के रेस्टोरेंट सहित तमाम सुविधाएँ मौजूद हैं।  मालरोड पर मनाली का मुख्य बाजार है यहाँ पर लोकल और ब्रांडेड सामने के साथ साथ छोटे बड़े रेस्टोरेंट मौजूद हैं। जिनमे सभी तरह के खाने पीने का सामान मिल जाता है।

रोहतांक दर्रा

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मनाली से 52km की दूरी पर रोहतांक दर्रा स्थित है। जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 1350fit  है। रोहतांक में काफी सर्दी होती है। रोहतांक में प्रकृति के विराट स्वरुप के दर्शन होते हैं। यहाँ से नज़र आती बर्फ से ढंकी सूंदर हिमालय पर्वत माला मन को मंत्र मुग्ध कर देती है । रोहतांक के ढलानों पर दूर दूर तक बर्फ के मैदानों पर हर तरफ पर्यटक मौज मस्ती करते हुए मिल जाते हैं रोहतांक में बर्फ में होने वाली रोमांचक खेल जैसे skiing और बर्फ के स्कूटर के सवारी का लुफ्त भी लिया जा सकता है।

सोलांग  घाटी

Solang
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 मनाली से 14km की दूरी पर उत्तर की दिशा में सोलांग  घाटी स्थित है। यहाँ का मौसम बहुत हीं सुहावना रहता है। यहाँ के पहाड़ी ढलान गर्मियों में हरी भरी घास की चादर से ढंके रहते हैं। सोलान घाटी में पर्यटक पैराग्लिडिंग ,parachuting और घुड़सवारी का आनंद ले सकते हैं यहाँ rope way की भी व्यवस्था है जो लोगों को सोलांग के सबसे ऊँचे पहाड़ी की सैर कराती है। जिसकी टिकट 400rs  प्रति व्यक्ति होती है। मनाली जाने वाले पर्यटकों को सोलांग घाटी जरूर जाना चाहिए।

विशिष्ट गांव

मनाली से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर रावी नदी के किनारे विशिष्ट गांव मौजूद है यहाँ पर सल्फर के पानी से युक्त कई गर्म पानी के झरने मौजूद हैं। यहाँ महिलाओं और पुरुषों के नहाने की अलग अलग व्यवस्था है। यहाँ भगवन विष्णु का एक मंदिर भी बना हुआ है। मनाली यात्रा के दौरान पर्यटक कुल्लू  ,नग्गर ,कसोल ,और मणिकरन के भी दर्शन कर सकते हैं। आप मनाली जब भी जाएँ तो कम से कम पांच दिन का प्रोग्राम बना के हीं जाये। 

मुझे पूरा विश्वास है की आपकी मनाली की यात्रा यादगार और आसान रहेगी। 

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