Badrinath  जो अलकनंदा नदी के किनारे  Uttarakhand State  में स्थित है। यह Temple भगवान विष्णु के रूप Badrinath को समर्पित है। यह हिन्दुओं के चार धाम मे से एक धाम है। ऋषिकेश से यह 294 km की दूरी पर उत्तर North  direction  में स्थित है।

इस धाम के बारे में यह कहावत है कि ‘जो जाए बदरी, वो ना आए ओदरी’ यानी जो व्यक्ति Badrinath के दर्शन कर लेता है उसे पुनः माता के उदर यानी गर्भ में फिर नहीं आना पड़ता है। इसलिए शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य को जीवन में कम से कम एक बार Badrinath के दर्शन जरूर करना चाहिए।

मैं अपनी चारो धाम में सबसे आखरी Badrinath के मंदिर की  यात्रा की । Badrinath के ओर जाने वाली सड़के बहुत हीं सुन्दर है प्राकृतिक सुंदरता चरम पर है । हनुमान चेट्टी एक छोटा सा क़स्बा है, जहाँ सभी भक्तजन Badrinathजाने से पहले भगवान हनुमान से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए रुकते हैं । महाभारत में भीम के बारे में एक कहानी काफी प्रचलित है । भीम  हनुमान की पंच उठाने में नाकामयाब हुए थे ये वही जगह है जहाँ पर यह हुआ था भीम को भगवान को हनुमान द्वारा किसी का अपमान न करने का पाठ पढ़ाया गया था ।  

वहां से आशीर्वाद लेने के बाद मैं आगे बढ़ी ।  

Badrinath हिन्दू संस्कृति के सबसे पवित्र वैष्णव तीर्थस्थलों में से एक है । Badrinath मंदिर के अलावा यहाँ भव्य अलकनंदा नदी बहती है । ,Badrinath मंदिर चार धाम यात्रा का चौथा धाम है । यह भगण विष्णु को समर्पित 108 दिव्यदेशम का हिस्सा भी है । मदिर में पूजा के लिए बद्रीनारायण के रूप में विष्णु के 1 मीटर लम्बी और काली मूर्ति विराजमान है । कई हिन्दुओं द्वारा प्रतिमा को 8 स्वयं व्यक्तविधाओं में से एक माना जाता है इसे विष्णु की स्वयंभू प्रतिमा कहा जाता है । Badrinathमंदिर नीलकंठ पर्वत की पृष्ठभूमि के सामने नर और नारायण दो चोटियों से घिरा है Badrinath मंदिर में केवल मई से नवम्बर तक हीं जाया जा सकता है । सर्दियों में हिमालय की जटिलताओं के कारण  वहां पहुंचना मुंकिन नहीं है । इस स्थिति में Badrinath मंदिर बंद रहता है ।  

Badrinath in  Uttarakhand State
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Badrinath मंदिर के ठीक नीचे तप्त कुंड (Tapt Kund )है ,जो गरम गंधक का एक श्रोत है जिसमे कई औषधिये गुण पाए जाते हैं । कई तीर्थयात्री मंदिर जाने से पहले इस झरने में स्नान जरूर करते हैं ।

Badrinath in  Uttarakhand State
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पौराणिक नदी सरस्वती की उत्पत्ति बदरीनाथ के निकट एक glacier से हुई है । यह नदी अलकनंदा में मिलती है और फिर लुप्त हो जाती है प्रयागराज में सरस्वती ,गंगा और यमुना नदी के साथ पवित्र त्रिवेणी संगम में जा मिलती है ।

History of Badrinath  (बद्रीनाथ का इतिहास ) 

बद्रीनाथ के निर्माण की तिथि अज्ञात है हांलाकि ये माना जाता है, कि ये कुछ हज़ार साल पुराना है स्कंदपुराण के अनुसार  9 वी शताब्दी में श्री आदि शंकराचार्य को भगवान विष्णु की एक बड़ी काली मूर्ति मिली थी ,जो नारदकुंड के किनारे पायी गयी उन्होंने तप्त कुंड के निकट एक गुफा में इस मूर्ति को स्थापित कर दिया । जिसे बाद में बद्रीनाथ मंदिर के नाम से पूजा गया ।

कुछ महापुरुषों के अनुसार भगवान विष्णु थुलिंग से दूर इस स्थान पर ध्यान में बैठे थे। थुलिंग हिमालय में एक जगह है, जो मांस खाने वाले भिक्षुओं और अयोग्य लोगों से दूषित है । ध्यान के दौरान विष्णु ठन्डे मौसम से अनजान थे । उनकी पत्नी लक्ष्मी ने बद्री वृक्ष के रूप में उनकी रक्षा की लक्ष्मी की भक्ति से प्रसन्न होकर विष्णु ने स्थान का नाम बद्री का आसन और बद्रीनाथ रखा ।

Badrinath
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Badrinath मंदिर जुड़ी एक और मान्यता प्रचलित है कि पुराने समय में इस क्षेत्र में जंगली बेरों के वृक्षों काफी अधिक मात्रा में थे। इस वजह से इसे बद्री वन भी कहा जाता था।

इस Badrinath क्षेत्र से जुड़ी एक और मान्यता है कि यहां किसी गुफा में वेदव्यास ने महाभारत लिखी थी और पांडवों के स्वर्ग जाने से पहले यहीं उनका अंतिम पड़ाव भी था, वे यहीं रूके भी थे।

इस तरह मेरी चौथी और अंतिम धाम की यात्रा पूरी हुई ।

How To Reach Badrinath  

Badrinath के सबसे nearest railway station  ऋषिकेश है। ये स्टेशन बद्रीनाथ से करीब 297 किमी दूर स्थित है। ऋषिकेश भारत के सभी Main शहरों से जुड़ा है। Badrinath के लिए सबसे नजदीक स्थित Jolly Grant Airport देहरादून में है। ये एयरपोर्ट यहां से करीब 314 किमी दूर स्थित है। ऋषिकेश और देहरादून से  Badrinath आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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