Jagannath Puri Dham अपने सुनहरे समुद्र तटों और Temple के लिए विख्यात है।  यह भारत के चारो कोणों में बने चार धामों में सबसे प्रसिद्ध धाम है। जगरनाथ पूरी मंदिर वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है जो भगवान श्री कृष्ण जी को समर्पित है यहाँ भगवान श्री कृष्ण को जगरनाथ के नाम से जाना जाता है। जगरनाथ पूरी में भगवान जगरनाथ उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं।  जगरनाथ पूरी में पुरे साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते रहते हैं

Jagannath Puri Dham
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जगन्नाथ पुरी कैसे जाएँ

जगरनाथपुरी जाने के लिए उड़ीसा राज्य  में स्थित पूरी शहर पहुंचना होता है। पूरी तक देश के अलग अलग शहरों से लगभग रोज़ ट्रेनें चलती हैं ट्रैन के अलावा श्रद्धालु पूरी तक सड़क मार्ग से भी आ सकते हैं। जगरनाथपुरी का सबसे निकटतम हवाईअड्डा भुवनेश्वर में बना हुआ है। जहाँ कई शहरों से नियमित हवाई सेवा उपलब्ध है।

जगन्नाथ पुरी में कहाँ रुकें

भुवनेश्वर से जगरनाथपुरी की दूरी 60km की है पूरी में काफी संख्या में होटल और धर्मशाला मौजूद है जिनमे यात्री अपने बजट के अनुसार कमरा किराये पर लेकर रात में रूक सकते हैं इसके अलावा मंदिर प्रशासन के द्वारा भी श्रद्धालुओं को रुकने के लिए जगरनाथपुरी से कुछ हीं दूरी पर निलाग्रि  भक्त निवास ,श्री गुंडिजा भक्त निवास और नीलांचल भक्ति आद्री बनाये गए हैं। जिनमे AC और nonAC कमरे उपलब्ध रहते हैं जिनका किराया 660 rs से 1600rs तक का होता है। इन यात्री निवासों में रुकने के लिए श्रद्धालुओं को मंदिर प्रशासन की website पर जा कर पहले से online booking करवानी होती है।

जगन्नाथ पुरी दर्शन का समय

जगरनाथपुरी वैसे तो  पुरे साल जाया जा सकता है लेकिन भीड़ भाड़ से दूर रहने वाले श्रद्धालुओं को जगरनाथपुरी अक्टूबर से फरवरी के बीच जाना चाहिए । इस समय पुरी का मौसम अभी काफी अच्छा  रहता है। इसके अलावा जिन श्रद्धालुओं को जगरनाथपुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा देखनी हो तो उन्हें आसाढ़ के महीने में जाना चाहिए इस रथ यात्रा का आयोजन आसाढ़ माह में शुक्ल पक्ष के द्वितीया को होता है । जिसकी आधिकारिक तिथि मंदिर प्रशासन द्वारा पहले से हीं घोषित कर दी जाती है । यह रथ यात्रा महोत्सव 10 दिन तक चलता है। रथ यात्रा के दौरान पुरी में लाखों की संख्या में देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं जिस कारण यहाँ बहुत ज्यादा भीड़ भाड़ हो जाती है।इसलिए रथ यात्रा में जाने से पहले श्रद्धालुओं को पुरी में स्थित भक्त निवासों या होटलों में पहले से हीं कमरे ऑनलाइन बुक करवा के जाना चाहिए।

जगन्नाथ पुरी मंदिर की कहानी

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पुराणों में वर्णित है कि एक बार श्रीकृष्ण की पटरानियां माता रोहणी से श्रीकृष्ण भगवान और गोपियों की प्रेमकथाएँ सुन रही थी श्री कृष्ण की बहन सुभद्रा भी उस समय वहां पर थी लेकिन उस समय उनका ये कहानियां सुन्ना उचित नहीं था माता के आदेश पर वे दरवाज़े के बाहर जा कर खड़ी हो गयी उसी समय श्रीकृष्ण भगवान और उनके बड़े भाई बलराम वहां आ पहुंचे सुभद्रा ने दोनों भाइयों को दरवाज़े पर हीं रोक लिया लेकिन अंदर से आवाज़ें बाहर आती रहीं और तीनो वो अद्भुद प्रेम लीलाएं सुनते रहे माता रोहिणी का वर्णन था हीं कुछ ऐसा वो तीनो प्रेम द्रवित हो उठे उसी समय नारदमुनि वहां पहुंचे और उन्होंने प्रार्थना की कि इसी प्रेमद्रवित रूप में तीनो विराजमान हो श्रीकृष्ण ने वचन दिया कि वो कलयुग में सुभद्रा और बलभद्र के साथ श्री जगरनाथ के नाम से काठ की मूर्तियों में विराजमान होंगे। कलयुग के पावन इस धाम में राजा इन्द्रद्युम्न को  काठ के शिला में दर्शन दे कर भगवान जगरनाथ नीलांचल के धरती पर विराजमान हो गए। काठ के उस शिला से भगवान जगरनाथ , बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाएं खुद भगवान विश्वकर्मा ने अपने हाथों से रची थी। कालचक्र में जैसे चारों युगों का जितना महत्व है तीर्थों में चार धाम भी उतनी हीं महत्वपूर्ण है ये चार धाम चारों धाम चारों दिशाओं को पवित्र कर रही है उत्तर ,दक्षिण ,और पश्चिम में जहाँ सतयुग ,द्वापर ,और त्रेता युग के धाम है वहीं पूरब में जगरनाथ पूरी कलयुग का अकेला धाम है। बद्रीनाथ में नारायण ,द्वारिका में कृष्ण और रामेश्वर में राम के नाम से भगवान विष्णु हर युग में पूजे गए हैं कलयुग में इस परम शक्ति का रूप भगवान श्री जगरनाथ हैं।

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जगरनाथ पूरी का मंदिर 4 लाख वर्ग फुट के क्षेत्र  में फैला  है और चारो ओर से 20 फुट ऊँची चार दीवारी से घिरा है कलिंग शैली में बना यह मंदिर भारत के विशाल मंदिरों में से एक है जिसकी ऊंचाई 214 फुट है जगरनाथ मंदिर के शिखर पर बहुत हीं  खूबसूरत सुदर्शन चक्र बना हुआ है जो कि अष्ट धातुओं से बना हुआ है इसे नीलचक्र कहा जाता है। मंदिर के चारो दिशाओं में चार द्वार बने हुए हैं,जो क्रमशः पूर्व मे सिंह द्वार / मोक्ष द्वार, दक्षिण अश्व द्वार / काम द्वार, पश्चिम व्याघ्र द्वार / धर्म द्वार, उत्तर मे हाथी द्वार / कर्म द्वार है। मंदिर के सिंह द्वार पर कोणार्क सूर्य मंदिर से अरुण स्तंभ ला कर  स्थापित किया गया है, तथा कोणार्क मंदिर के मुख्य भाग   भगवान सूर्य देव को भी यहीं स्थापित कर दिया गया है। मंदिर में दर्शन करने के लिए आम लोगों को सिंह द्वार से प्रवेश करना होता है। जगरनाथ पूरी का मंदिर सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है

जगन्नाथ पुरी के दर्शनीय स्थल

गुण्डिचा मंदिर

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इसके अलावा भी पूरी और उसके आस पास कई देखने लायक मंदिर हैं जिसमे गुण्डिचा मंदिर एक है यह मंदिर जगरन्नाथ मंदिर से 2km कि दूरी पर स्थित है गुण्डिचा में भगवान श्री कृष्ण की मौसी रहती हैं रथ यात्रा के अलावा यहाँ ज्यादा गतिविधियां नहीं होती हैं रथ यात्रा के दौरान भगवान कृष्ण ( जगन्नाथ), भाई  बलभद्र (बलराम ) और बहन सुभद्रा की मूर्तियां इस मंदिर तक की यात्रा करती हैं और रथ यात्रा के दौरान इसी मंदिर में रहती हैं

लोकनाथ मंदिर

इसके अलावा पूरी का लोकनाथ मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है यह मंदिर जगरनाथ मंदिर से 1km की दूरी पर स्थित है यह पूरी का बहुत प्रशिद्ध शिव मंदिर है माना जाता है भगवान राम ने इस जगह पर अपने हाथों से इस शिवलिंग की स्थापना की। यहाँ शिवलिंग पानी के निचे स्थित है केवल शिवरात्री के त्यौहार पर पूजा के लिए इसका सारा पानी निकाला जाता है और तभी इस शिवलिंग को देखा जा सकता है।

मारकंडेश्वर शिव मंदिर

Markandeshwar shiv mandir
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मारकंडेश्वर शिव मंदिर भी पूरी का प्रसिद्ध मंदिर है जो जगरनाथ मंदिर से लगभग 4km की दूरी पर पूरी ब्रम्हागिरी रोड के पास स्थित है यह मंदिर पूरी धाम के पांच तीर्थों में से एक है पेड़ों और घाटों से घिरा यह मंदिर बहुत हीं खूबसूरत  है। यहाँ पर्यटकों के लिए स्नान करने वाले घाट उपलब्ध हैं काफी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पर पिंड दान और मुंडन जैसे अनुस्थानो को घाटों पर करते हैं। पूरी से 35km की दूरी पर कोणार्क का विश्वविख्यात सूर्य मंदिर बना हुआ है।  पूरी से कोणार्क जाने के लिए बसें और टेक्सी मिल जाती है।

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