यमुनोत्री मंदिर  yamunotri temple  गढ़वाल हिमालय Garhwal Himalayas  के  west में समुद्र तल से 3235 m की Height पर है। यमुनोत्री (yamunotri)चार धामों में से एक है।

महाभारत के अनुसार जब पाण्डव उत्तराखंड की तीर्थयात्रा मे आए ,तो वे पहले yamunotri तब gangotri फिर  kedarnath- badrinath की ओर बढ़े थे, तभी से उत्तराखंड में चार धाम यात्रा की जाती है। प्रत्येक वर्ष मई से अक्टूबर के महीनो के बीच  yamunotri  के दर्शन करने के लिए लाखो श्रद्धालु व तीर्थयात्री इस स्थान में आते है।

uttarakhand char dham yatra map
Image source :- Google ( uttarakhand char dham yatra map )

मैंने  yamunotri की यात्रा एक खच्चर पर की , जनकीचट्टी से  yamunotri के लिए 5 km तक का trek है आप चाहें तो ये दूरी trek से ,खच्चर पालकी या फिर पिट्टू से भी तय कर सकते हैं इस दूरी को पैदल तय करने में 3 घंटे और खच्चर से तय करने में 2 घंटे का समय लगता है आप counter से खच्चर या पालकी की ticket खरीद सकते हैं| trekking route अच्छी तरह से develop है और काफी safe भी है सुबह सुबह के उजाले में trek की शुरुआत करना सही रहता है क्यूंकि उस समय मौसम भी सुहाना रहता है और आप temple  की भीड़ भाड़ से भी बच सकते हैं दो घंटे की ख़चद की सवारी के बाद मुझे यमुनोत्री की पहली झलक मिली और मेरा दिल ख़ुशी से भर गया   मंदिर से जाने वाले route में पूजा के विभिन्न सामान मिलते हैं

yamunotri  trek
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यहाँ खाने के लिए आप पराठा,समोसा और मैगी जैसे चीज़ों का लुप्त उठा सकते हैं ।

yamunotri पवित्र यमुना नदी का उद्गम स्थान है देवी यमुना को समर्पित yamunotri temple हिमालय पर्वतमाला के घने जंगलों के बीच 3300 m की height पर स्थित है । मंदिर आमतौर पर चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है । मंदिर को  अक्षय तृतिया जो आम तौर पर मई में होता है ,पर खोला जाता है । इस साल अक्षय तृतिया 26 अप्रैल को है इसलिए गंगोत्री ओर यमुनोत्री दोनों धामों के कपाट 26 अप्रैल को खुल जायेंगे और याम द्वितया पर बंद किया जाता है । जो दिवाली के बाद दूसरे दिन पड़ता है। यमुना नदी का वास्तविक उद्गम स्थान कालिंद पर्वत पर स्थित एक ग्लेशियर है जो मंदिर से 4400 m की height  पर स्थित है ।  

यमुनोत्री मंदिर( yamunotri temple)
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ऐसा कहा जाता है कि यमुनोत्री धाम वह स्थान है ,जहाँ ऋषि आसित मुनि रहते थे । ऋषि ने अपने प्रारंभिक जीवन के दौरान गंगा और यमुना नदी दोनों में स्नान किया हांलाकि जैसे- जैसे वह बूढे होने लगे वह गंगा नदी में डुबकी लगाने के लिए वह गंगोत्री तक पहुँचने में असमर्थ थे । उनके इस प्रबल विश्वास को देखकर देवी गंगा यमुना नदी के बगल में एक धारा के रूप में उभर आई जिससे ऋषि को अपने धार्मिक अनुष्ठानों को जारी रखने में सहायता मिल सके ।

यमुना भगवान सूर्य और देवी संज्ञा जिन्हें चेतना की देवी भी कहते हैं उनकी पुत्री हैं , और मृत्यु के देवता यम की बहन है । कहते है कि भैयादूज के दिन जो भी व्यक्ति यमुना में स्नान करता है ,उसे यमत्रास से मुक्ति मिल जाती है । इस मंदिर में यम की पूजा का भी विधान है। भक्तों की मान्यता है की यमुना नदी में डुबकी लगाने से पीड़ारहित मृत्यु होती है और सूर्य भगवान का आशीर्वाद मिलता है ।

वास्तुकला के दृष्टि से मंदिर का निर्माण नागर शैली में किया गया है । मंदिर ग्रेनाइट के पत्थरों से बना है, जो आस पास के पहाड़ों से प्राप्त किये गए हैं । मंदिर में एक शंकुआकार की मीनार है जिसके निचे देवी यमुना की प्रतिमा विराजित है । प्रतिमा polished ebony marble से बनी हुई है । जिस पर महीन  नक्काशी की गयी है। मूर्ति एक कछुए के ऊपर विराजमान है जिसको प्राचीन ग्रंथों में देवी यमुना का प्रतिनिधि माना गया है ।

उसके बगल में देवी गंगा की एक सफ़ेद पत्थर की मूर्ति खड़ी है यमुनोत्री में गरम पानी के दो झरने मौजूद है । जो थके हुए यात्रियों को राहत और सुकून देते हैं । इनमे सूर्यकुंड (surya kund) – जिसमे उबलता हुआ गर्म पानी है । सूर्यकुंड (surya kund) का यह गर्म जल आलू और चावल पकाने के लिए पर्याप्त माना जाता है । प्रवेश द्वार पर आलू और चावल के छोटे छोटे bags बेचे जाते हैं । मैंने भी एक बैग ख़रीदा और सूर्य कुंड की और प्रस्थान किया गर्म पानी के इस झरने में करीब 5 min तक इस bag को पकाया जाता है ,फिर उन्हें प्रसाद के रूप में भक्तों को सौप दिया जाता है |

सूर्यकुंड (surya kund)
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जबकि गौरीकुंड (Gaurikund) -इसमें स्नान के लिए उपयुक्त पानी है ,तीर्थयात्री गौरीकुंड (Gaurikund) में स्नान करते हैं ताकि अपने पापों को धो सके और इस थका देने वाली यात्रा में आराम पा सके ।

 गौरीकुंड (Gaurikund)
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यह सच में आश्चर्यजनक है कि पानी कि एक छोटी सी धारा एक बड़ी नदी का स्वरुप ले लेती है और लाखों लोगों का जीवन – यापन करती है ।

yamunotri
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इसके शीर्ष पर, हिमालय  Right ओर मंदिर ओर नीचे बहती यमुना नदी देखने में अत्यधिक सुन्दर लगती है माँ यमुना के अद्भुद दर्शन के बाद मैंने नीचे पैदल जाने का निश्चय किया पैदल वापस जाना मेरे लिए काफी अच्छा अनुभव हुआ । पुरे रास्ते मुझे हिमालय कि सुंदरता को निहारने का मौका मिला ,मेरी  यह यमनोत्री धाम की   यात्रा सफलतापूर्वक पूरा हुआ आपको भी यह मेरा छोटा सा प्रयास अच्छा लगा होगा ।

How To Reach Yamunotri From Delhi

हवाईमार्ग (Airport)

यमुनोत्री के सबसे नजदीक देहरादून का  Jolly Grant Airport है जो यमुनोत्री से करीब 210 किलोमीटर दूर है। Delhi से इस Airport के लिए Daily Flight उपलब्ध रहती है। यहां से आप हनुमान चेट्टी के लिए Taxi कर सकते हैं जहां से  yamunotri का  trek शुरू होता है। इसके अलावा यहां से  Helicopter service भी ले सकते हैं जो एक ही दिन में  yamunotri के दर्शन कराकर वापस देहरादून छोड़ देता है। देहरादून से Helicopter service का किराया करीब 85 हजार रुपए प्रति व्यक्ति है।

Railway

yamunotri से सबसे  nearest  railway station देहरादून है जो करीब 175 km दूर है वहीं ऋषिकेश करीब 200 km  दूर है यह railway station  दूसरे  railway station से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यहां से आप  Roadway के जरिए आगे का सफर कर सकते हैं। इसके लिए आप bus , या taxi का चुनाव कर सकते हैं। देहरादून और ऋषिकेश railway station  के अलावा हरिद्वार और कोटद्वार railway station  से भी भी yamunotri पहुंचा जा सकता है। यहां से भी yamunotri तक Roadway से जाने के सभी साधन उपलब्ध हैं।

Roadway

yamunotri पहुंचने के लिए धरासू तक का मार्ग वही है जो Gangotri का है। धरासू से yamunotri और Gangotri के रास्ते अलग-अलग हो जाते हैं। यहां पहुंचने का सबसे अच्छा रास्ता बड़कोट और देहरादून से होकर निकलता है। इसके बाद धरासू से यमुनोत्री की तरफ बड़कोट फिर जानकी चट्टी तक Bus द्वारा Tour होती है। जानकी चट्टी से 5 किलोमीटर पैदल चलकर yamunotri पहुंचा जाता है। जानकी चट्टी से पिठ्टू, खच्चर या पालकी के जरिए यमुनोत्री मंदिर तक पहुंच सकते हैं। yamunotri तक गाड़ी से जाने के लिए कोई रोड नहीं बना है। लेकिन जानकी चट्टी तक पहुंचने के लिए नियमित रुप से Bus, Taxi और cab की सुविधा उपलब्ध रहती है।

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